अधिकतर पंजाब, हरियाणा के किसान विरोध में सबसे आगे क्यों हैं?

अधिकतर पंजाब, हरियाणा के किसान विरोध में सबसे आगे क्यों हैं?

बीते कुछ दिनों से हमारे देश में 2 महीने पहले पास कृषि बिल के विरोध में किसानो का प्रदर्शन जारी हैं I खासकर इस आंदोलन में पंजाब और हरियाणा के किसानो में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं I पुरे देश से किसानो ने दिल्ली चलो का एलान करते हुए 26 नवंबर (भारतीय संविधान दिवस) के अवसर पर दिल्ली में प्रदर्शन करने की योजना बनायीं I  लगभग देश की सारी किसान संगठनों ने इसका समर्थन किया | खासकर पंजाब और हरियाणा  से आ रहे प्रदर्शन किसानो के जोश को देखकर हरयाणा सरकार , जहां बीजेपी की सरकार हैं I उसने  भारी संख्या में ट्रेक्टर ट्रॉली के साथ आ रहे किसानो को कई जगहों पर COVID – 19 का हवाला देते हुए रोकने का प्रयास किया I इस क्रम में पुलिस वाटर कैनल और यहाँ तक पुलिस ने सड़क भी खोद डाली ताकि किसान हरियाणा नहीं पार कर सके I लेकिन तब भी किसानो का जोश काम नहीं हुआ और हरियाणा पुलिस की बैरिकेडिंग को हटIते हुए हरियाणा-दिल्ली के बॉर्डर जा पहुंचे I वहां भी उन्हें COVID-19 का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस जो की भारत के गृहमंत्री श्री अमित शाह के अंदर आती है वो किसानो को रोकने का काफी प्रयास किया I वहां पुलिस में पत्थर की  बैरिकेडिंग के साथ-साथ लोहे के कटीले तारो को भी लगा रखा था जो कटीले तार जो कश्मीर में पथरबाजो को रोकने के लिए उपयोग की जाती हैं I किसानो और दिल्ली पुलिस के बीच देर मस्कत चली जहां पुलिस में आंसू गैस के गोले का भी प्रयोग किया I लेकिन आखिरकार अंत में किसानो को 27 नवंबर के शाम में  दिल्ली के बुरारी क्षेत्र के निरंकारी समागम ग्राउंड में प्रदर्शन की अनुमति मिल गयी I पंजाब की राजनीती देखते हुए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने अपना समर्थन किसानो को दिया I हाल में ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी किसानो की अस्वासन दिलाने की कोशिश अपने मन की बात कायक्रम में की और साथ में गृहमंत्री श्री अमित शाह ने भी किसान यूनियन को बैठक करने की बात की लेकिन किसानो ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया | किसान यूनियन का कहना है की बैठक में शामिल होने के लिए उन्हें ये शर्त रखा जा रहा है की वो जो किसान हरियाणा- दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं पहले वहां से हट जाये | इस शर्तो को नहीं मानते हुए सारे किसान यूनियन ने बैठक करके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया | 

कब कैसे और क्यों हुयी इस आंदोलन की शुरुआत ?

सितम्बर माह में भारत सरकार कृषि बिल पास की जिसके विरोध में पंजाब के किसानो 24  अक्टूबर को 10 जगहों पैर रेल की पटरियों पर प्रदर्शन शुरू किया जिसके कारण पैसेंजर ट्रैन के साथ-साथ माल गाड़ियों की सेवाएं पंजाब में ठप हो गयी I कुछ जरुरी चीजों जैसे कोयला की सप्लाई बंद हो गयी जिसके कारण पावर कट की समस्या होने लगी I

21 अक्टूबर को किसान यूनियन ने एलान किया की अब रेल रोको कम्पैन बंद कर देंगे और फिर से माल गाड़िया शुरू होनी चाहिए लेकिन भारतीय रेलवे ने इस बात को नहीं मानी क्योकि रेलवे का मानना था की पैसेंजर और माल गाड़िया एक साथ शुरू होगी I पंजाब गवर्नमेंट ने सेंट्रल गवर्नमेंट के बिल को over rule करते हुए 3 बिल अपने विधान सभा में पारित किये , लेकिन बहुत लोगो जो संविधान का अच्छा ज्ञान रखते हैं उनका मानना है की ये बिल निश्चित नहीं है की कानून में तब्दील हो पायेगी  I इसके बाद ही किसानो ने दिल्ली चलो का एलान कर दिया इस कम्पैन को शुरू All india kisan coordination committee ने किया , और लगभग 500 किसान संगठनों ने समर्थन दिया I

क्या है किसानों की प्रमुख मांगे ?

1. सेंट्रल गवर्नमेंट जो बिल सितम्बर में पास किये है उसे वापस ले I

2. MSP(Minimum support price) निर्धारित की जाए जो किसान गवर्नमेंट से लिखित देने का मांग कर रहे हैं I 

3. Electricity amendment bill को हटा ली जाए जिसके कारण उन्हें बिजली बिल में राहत मिल सके I

4. Stubble burning के लिए जो कानून बनाये गए हैं उनको हटा ली जाये जिसमे 3 साल जेल और 1 करोड़ तक की जुर्माना हैं I

5. जिन किसानों को stubble burning के जेल हुआ उनको रिहा कर दी जाये I

इस आंदोलन में हरियाणा और पंजाब के किसानों की भारी संख्या होने की कुछ मुख्य कारण हैं:

MSP(Minimum support price) का फायदा ज्यादातर पंजाब और हरियाणा की किसानो को ही होती हैं I MSP 23 फसलों पर लागू होती हैं , पर हमारी सरकार ज्यादातर गेहूं और धान MSP पर खरीदती  हैं |

करीब 30% गेहूं और धान MSP पर खरीदी जाती हैं | जिन राज्यों में हरित क्रांति की शुरुआत थी | उन राज्यों की किसानो को ज्यादा फायदा होती हैं | ये राज्ये मुख्यतः पंजाब , हरियाणा ,पश्चिमी उत्तर प्रदेश हैं |

 55% से ज्यादा इन ही तीनो राज्यों से गेंहू और धान सरकार MSP  पर खरीदती हैं |एक रिपोर्ट के अनुसार 2018-19 में गेंहू हरियाणा से लगभग 80% और पंजाब से लगभग 73% MSP पर सरकार द्वारा ख़रीदा गया था |

Source: Hindustan Times | Feb 2018

पंजाब और हरियाणा के किसानों को ही क्यों MSP से ज्यादा फायदा होती हैं ?

1. दूसरे राज्यों में Agricultural Produce Market Committee (APMC) मंडी की कमी हैं जिसके कारण सरकार MSP पर फसल ज्यादा नहीं खरीद पाती हैं | M. S. Swaminathan जिनका हरित क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान था | उनके अनुसार APMC मंडी करीब 80 वर्ग किलोमीटर में होनी चाहिए और किसी भी किसान के 5 किलोमीटर की रेडियस में एक मंडी होनी चाहिए | इन तीन राज्यों (पंजाब , हरियाणा ,पश्चिमी उत्तर प्रदेश) के अलावा और किसी दूसरे राज्यों में आसानी से मंडी नहीं मिलती है | दूसरे राज्यों के किसानों को मंडी तक पहुंचने में  ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती हैं | उदाहरण के लिए बिहार में सरकारी मंडी 2006 में ही बंद कर दी गयी थी | यही कारण है की बिहार चुनाव में इस मुद्दा पर चर्चा नहीं हुयी |

Data reported as on 20.12.2019

2. अन्य राज्यों में धान की खेती काफी कम होती है | ज्यादातर राज्यों के किसान धान की खेती बेचने की मकसद से कम करके अपने ही इस्तेमाल के लिए ज्यादा करते हैं | इसलिए MSP  का महत्त्व इन तीन राज्यों (पंजाब , हरियाणा ,पश्चिमी उत्तर प्रदेश) के लिए ज्यादा हैं | एक रिपोर्ट के अनुसार 2016-17 से 2018-19 के बीच तीन सालो में सरकार पंजाब और हरियाणा से क्रमश: 89% और 85% उनके द्वारा उपजाई गई नॉन बासमती चावल खरीदी है बल्कि यह प्रतिशत आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में क्रमशः 51% और 11% हैं |

Vishal Kumar

Hello readers!! I am vishal kumar currently pursuing my bachelors with major in computer science . First of all, I feels privileged to be a part of this community and would like to thank the creator for giving me a chance to share my useful experiences with you all. Precisely, In today's fast moving world, there is not enough time for us to commit mistake and learn from those. Infact we have to learn from other's mistakes and life experiences and implement in our's. With this mind set, I am here to interact with you all.

This Post Has 4 Comments

  1. Avatar
    Shreyas

    Well written Vishal Kumar Lot of Knowledge.

  2. Avatar
    Guddu Kumar

    You written beautyful and this is useful knowledge for us

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